किसी से कुछ बांटने की खुशी ही अलग होती है। विशेष तौर से अगर ये खुशी मुस्कान हो तो। घटना नहीं बताऊँगी, शायद महत्व कम हो जाये, पर हाँ कभी कभी बहुत नगण्य दिखने वाली घटना भी आंतरिक सुकून दे देती है।
ऐसा होता है न कि जब घर का कोई सदस्य किसी काम से बाहर गया हो तो उसके लौटने पर हम उम्मीद करते हैं कि हमारे लिए कुछ न कुछ तो आया होगा।
समाज में प्रचलित विभिन्न वर्गीकरण को अगर आधार मान के चलें तो मध्यम वर्ग और उससे ऊपर के सभी वर्गों के लिए ये कोई मुश्किल काम नहीं है। पर उस परिवार का क्या जो निम्न या अति निम्न की श्रेणी में आता है?
ऐसा तो सम्भव नहीं है कि इच्छाएं सामाजिक वर्ग और पैसे देख कर आएं। एक माँ या पिता जो दिन भर मेहनत करते हैं और महीने के अंत में अपनी मेहनत की तुलना में बहुत कम तनख्वाह पाते हैं, जिनका उद्देश्य सिर्फ अपने परिवार को भूखा न रहने देना है, अपने छोटे बच्चे की इच्छा को देख कर भी अनदेखा कर देना शायद जीवन जीने की एक कला है।
अज़ीब लगता है जब सड़क पर छोटे बच्चों को गुब्बारे बेचते देखती हूँ, समझ नहीं आता यही गुब्बारा एक बच्चे के लिए मनोरंजन और दूसरे हमउम्र बच्चे के लिए जीविका है। समाज के इस भेदभाव को तो मैं पूरी तरह खत्म नहीं कर सकती, पर हाँ कुछ ऐसी कोशिश जो थोड़ी देर को ही सही किसी को अच्छा महसूस करा सके, कर सकती हूँ।
आज मैंने कुछ खरीदा सिर्फ़ इसलिए कि खरीद लेती हूं, मेरा कुछ भी नुकसान नहीं था, हाँ पर जिससे खरीदा, शायद उसके लिए वो रुपये बहुत थे। अब आगे सवाल ये था कि मेरे लिए वो सामान एक बोझ जैसा था (निश्चित रूप से हमारी जरूरत ही किसी भी वस्तु की उपयोगिता के मानक तय करती है), क्या करूँ मैं उसका? ख़ैर, बहुत ज़्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ा और मुझे एक छोटा सा अवसर मिल गया किसी के परिवार में छोटी से खुशी भेजने का। आज जो Happy Diwali बोला मैंने उसमें एक अज़ीब सुकून था। मतलब मैं महसूस कर पाई उस आभार को जो सामने वाला बोलना चाहता था, पर मैं सुनना नहीं चाहती थी।
हमारे आस पास बहुत अवसर होते हैं, पर ज़्यादातर हम नैतिकता की बातें बोलने में ही यकीन रखते हैं। एक सवाल के साथ अपनी बात को विराम दे रही हूं, उम्मीद है, हम सब अपने अंदर एक बार जरूर झांकेंगे... "किसी की ज़िंदगी में थोड़ा भी बदलाव लाने के लिए क्या वाकई नैतिक या जोश से भरी बातें करना जरूरी है? क्या शांत रह के नगण्य दिखने वाला व्यवहार नहीं किया जा सकता? क्या सच में दूसरों की स्वीकृति जरूरी है?"
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